राजनीती में किसका कितना योगदान है ये उस के उसकी पार्टी में किसी बड़े पद पर होने से नहीं आंका जा सकता! नेता वो होता है जिसने अपने किसी विचार से लोगो को प्रभावित किया हो! भीड़ सिर्फ लोगो का जमावड़ा होती है जिसका किसी आन्दोलन या किसी विचार से कोई लेना देना नहीं होता जबकि समर्थको मे अपने नेता के विचार या आन्दोलन को आगे बढ़ाने में योगदान होता है! भीड़ जुटाने से कोई नेता नहीं बन जाता है! नेता वही होता है जो अपने बातो से अपने समर्थको की संख्या बढ़ाये न की भीड़ बढ़ाये!
अब बात करते है की राहुल या अडवाणी ने देश की राजनीती को क्या दिया है! राहुल की बात करें तो आजतक उन्होंने देश के लिए भगवा आतंकवाद का खतरा बताकर समाज को बाटने के अलावा कुछ नहीं किया है! अगर व्यक्तिगत तोर पर बात करें तो राहुल गाँधी ने आजतक इस देश के लिए कुछ नहीं किया! उन्हें पार्टी में जो पद मिला है वो उनके किसी योगदान से नहीं बल्कि एक खास परिवार की सदस्य होने के कारन मिला है! गरीबो के साथ फोटो खिचाने या गरीबो के घर खाना खाने से ये साबित नहीं होता की आप ने देश के राजनीती मे कुछ खास किया है! देश से गरीबी मिटाने की बात करने वाले राहुल ने आजतक अपने संसदीये छेत्र अमेठी के गरीबो के लिए कुछ नहीं किया जबकि केंद्रे मे पिछले ६५ वर्षो मे से ५८ वर्षो तक कांग्रेस की ही सरकार रही है! खुद को गरीबो और किसानो का नेता कहने वाले राहुल ने आजतक गरबो या किसानो के घर पर खाना खाने के अलावा अगर कुछ किया है तो गरीबो और किसानो का मजाक ही उड़ाया है! राहुल गाँधी को राजनीती विरासत मे मिली है! यानि की बिना कुछ किये सीधे प्रधानमंत्री की रेस मे सामिल हो चुके है! क्या ये देश के लिए इससे बड़ा भी कोई मजाक होगा!
अगर बात करें अडवानी की तो उन्होंने अपनी राजनीती की सुरुआत वंहा से की है जन्हा पर कोई नेता नहीं कहा जाता एक कार्यकर्ता कहा जाता है! अगर किसी ने कांग्रेस का विकल्प बनाया है तो वो सिर्फ अडवाणी जी ही है! एक ऐसे समय मे लोगो को एक अच्छा विकल्प दिया जब कांग्रेस के अलावा देश मे कोई दूसरी पार्टी थी ही नहीं या जो थी भी तो वो सिर्फ दिखावा भर थी! अगर आज कांग्रेस घुटने के बल चलने को मजबूर है तो सिर्फ अडवाणी जी की वजह से! आज अगर एक मजबूत विपक्ष है तो सिर्फ अडवाणी जी की दूरदर्शी सोच के कारन, एक ऐसी पार्टी जिसका कोई जनाधार नहीं था लोगो को सिर्फ कांग्रेस और सिर्फ उसके नेता ही नजर आते थे उसको देश के सत्ता तक पहुँचाया! लोगो मे एक उम्मीद की एक रौशनी दिखाई सिर्फ अडवाणी जी ने!
अपने जीवन के लगभग ६० साल इस देश की राजनीती को देने से अगर वो प्रधानमंत्री के पद के लिए उपयुक्त है तो इसमें कोई गलत भी नहीं है! अगर राहुल सिर्फ एक परिवार विषेस के होने के कारन प्रधानमंत्री की दौड़ मे शामिल हो सकते है तो जिसने इतने वर्षो तक एक भ्रस्ट पार्टी से लड़कर एक आशा के किरण जगाई है तो उसके रस्ते मे रुकावट कैसे, क्या राहुल अडवाणी से ज्यादा काबिल है अगर है तो साबित करके दिखाये!
कांग्रेस हटाओ देश बचाओ!
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